Shadi

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-276-5

Author:RAHUL SANSKRITYAYAN

Pages:526


MRP : Rs. 450/-

Stock:In Stock

Rs. 450/-

Details

शादी

Additional Information

वसन्त के दिन अपनी पूर्ववत् शानो-शौकत से बीत चले। प्रसन्नमुख एवं प्राणदायक वसन्त के सूर्य ने अपना मुँह उघाड़ कर लोगों को अपने आने की सूचना दी। आसमान में काले बादलों की गरज और बिजली की चमक से भी इसकी सूचना मिली। अनेक तरह की चिड़ियों ने अपने मधुर गानों से सब तरफ़ आनन्द और उल्लास फैलाया, जो कि रंग-बिरंगे परोंवाली अपनी पोशाकें पहने दूर-दूर से आकर कू-कू, चः-चः, चिक्-चिक् करती कानों को तृप्त कर रही थीं। बादाम के दरख्तों में फूले हुए सफ़ेद फूल कपास के फूलों से होड़ ले रहे थे कि कौन अधिक उज्वल है। ज़मीन में सब जगह हरियाली की नर्म मखमल बिछी हुई थी। अब खेती का काम शुरू हुआ, जिसमें कलखोजची अपने जोशो-खरोश को बड़ी उमंग से दिखला रहे थे।... मार्च के आरम्भ का यह दिन बहुत ही साफ़ और सुन्दर था। आसमान मानो चुने हुए कपासों के लम्बे-चौड़े खेतों पर से, एक खलिहान से दूसरे खलिहान तक फैला था; और कपास के सफ़ेद ढेरों की तरह सफ़ेद बादलों के झुरमुट में से कभी छिपता कभी प्रकट दिखाई पड़ता था। फूलों की खुशबू से सुगन्धित और चिड़ियों की चहचहाहट से गुंजायमान वह वातावरण दिल को सन्तुष्ट करनेवाला था। शादी के कमरे की खिड़की के बाहरवाले फूल हरे पत्तों से लदे, आँखों को बहुत सुन्दर मालूम हो रहे थे, जिनमें नयी कलियाँ सिर उठाये खड़ी थीं। जिनके ऊपर रात की ओस की बूंदें मोती की तरह चमकती हुई गुलाब की पंखुड़ियों पर गुलाबी दीखती थीं। खिड़की खुली हुई थी, फूल से भरा हुआ गुलदस्ता खिड़की के पास रखा हुआ था, मधुमक्खियाँ बारी-बारी। से बैठकर मधसंचय कर रही थीं। दूर किसी खेत में से। ट्रैक्टर की घरघराहट सुनाई दे रही थी!

About the writer

RAHUL SANSKRITYAYAN

RAHUL SANSKRITYAYAN मूल नाम : केदारनाथ पांडे जन्म : 9 अप्रैल 1893, पन्दहा, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिन्दी विधाएँ : यात्रा वृत्तांत, कहानी, उपन्यास, आत्मकथा, जीवन मुख्य कृतियाँ कहानी संग्रह : सतमी के बच्चे, वोल्गा से गंगा, बहुरंगी मधुपुरी, कनैला की कथा उपन्यास : बाईसवीं सदी, जीने के लिए, सिंह सेनापति, जय यौधेय, भागो नहीं दुनिया को बदलो, मधुर स्वप्न, राजस्थान निवास, विस्मृत यात्री, दिवोदास आत्मकथा : मेरी जीवन यात्रा जीवनी : सरदार पृथ्वीसिंह, नए भारत के नए नेता, बचपन की स्मृतियाँ, अतीत से वर्तमान, स्तालिन, लेनिन, कार्ल मार्क्स, माओ-त्से-तुंग, घुमक्कड़ स्वामी, मेरे असहयोग के साथी, जिनका मैं कृतज्ञ, वीर चंद्रसिंह गढ़वाली, सिंहल घुमक्कड़ जयवर्धन, कप्तान लाल, सिंहल के वीर पुरुष, महामानव बुद्ध यात्रा साहित्य : लंका, जापान, इरान, किन्नर देश की ओर, चीन में क्या देखा, मेरी लद्दाख यात्रा, मेरी तिब्बत यात्रा, तिब्बत में सवा वर्ष, रूस में पच्चीस मास, घुमक्कड़-शास्त्र सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म भूषण, त्रिपिटिकाचार्य निधन 14 अप्रैल 1963, दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)

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