Zindaani

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-864-5

Author:Saroj Vashishth

Pages:78


MRP : Rs. 125/-

Stock:In Stock

Rs. 125/-

Details

ज़िन्दानी

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जितनी बहादुरी से समय की क्षणभंगुरता को सरोज ने अपने आंचल में संभाला है उसे पल पल जिया है, उसे व्यर्थथा में खोया नहीं है वह सबके बलबूते की बात नहीं है। मुझे लगता है किसी के जीवन के समानांतर चलकर उसका साक्षित्व रखना उसमें अहष्य रूप में दाखिल हो जाना एक प्रयास है, घटना नहीं है, एक उप-उत्पत्ति है-उसकी अपनी समग्रता है। सरोज आज कंप्यूटर पर धड़ाधड़ काम करती है। आस-पास के घरों के लोगों से ही नहीं परिंदों से, चीड़ और पाईन वृक्षों से रिश्ता जोड़े अपने सेब के बगीचे के मालियों पड़ौसी किसानों से हँसी ठट्ठा करती अपनी अहंकार हीन आत्मा में कहीं गहराई से अपने विद्वान बेटे गप्प जी को जी रही है। ज़िन्दानी कहानी संग्रह में हर जगह सरोज है और उनकी उठती गिरती साँस है, जो अब अपने विदेश के बसे पुत्र में साथ तो उठती गिरती ही है। अपने आस-पास प्रकृति के साथ जी रहे पौधों, दरख्तों और पक्षियों के साथ भी वैसे ही धुली रहती है जैसे अपने मित्रों, सहयोगियों और सहकर्मियों के साथ। सरोज जी कभी अकेली नहीं है, उनके पास से गुज़र जाने वाला भी उनका अपना हो जाता है। मैं उनके इस रूप को, व्यक्तित्व को सलाम करती हूँ। - पदमा सचदेवा

About the writer

Saroj Vashishth

Saroj Vashishth सरोज वशिष्ठ आकाशवाणी दिल्ली से 1989 में उद्घोषिका, अनुवादिका के पद से 29 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त लेकिन रेडियो शिमला और दिल्ली में अभी भी सक्रिय भागीदार। 1960 से निरंतर नाटक समीक्षक। लोगोस नामक अनुवाद ब्यूरो का (अंग्रेजी, हिंदी, फ्रैंच, जापानी) संचालन। सम्मान : साहित्य और रंगकर्म के माध्यम से कैदियों के साथ साहित्य के माध्यम से किए गए काम के लिए 16 सितम्बर, 1965 को विजया फाउंडेशन अवार्ड; 4 अप्रैल, 1997 को रेड एंड व्हाइट बहादुरी अवार्ड; 10 अप्रैल, 1997 को भगवान महावीर अवार्ड, 1 दिसम्बर, 1999 को हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल वी.एस. रमादेवी द्वारा सम्मानित; 2000 में संस्कार भारती शिमला इकाई द्वारा साहित्य सेवा के लिए सम्मानित; 4 मार्च 2001 को हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल द्वारा हिमात्कर्ष राष्ट्रीय एकात्मकता पुरस्कार, समाज सेवा कार्यक्षेत्र में अद्वितीय कार्य श्रेष्ठता के लिए उना में सम्मानित; जून, 2001 में शिमला इन्नर व्हील द्वारा सम्मानित। 1996 में हिमाचल के कारावासों में निरन्तर सेवा के लिए भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा इंडिया विजय फाउन्डेशन पुरस्कार से सम्मानि-8 सितंबर, 20071 दो कहानी संग्रह - अपने-अपने कारावास 1982. जिन्दानी 2008 (अभिव्यंजना प्रकाशन), तिहाड़ जेल में ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं - एक अनुभव, 1997 और मोर्चा दर मोर्चा - किरण बेदी के विचारों पर आधारित संस्मरण 1981 (वाणी प्रकाशन), 1966 से 2008 तक हिमाचली जेलों में किए काम का लेखा जोखा "ऐराफ"। सदस्य : सिद्धार्थ महिला कल्याण संस्था व दिल्ली कलाकर्म की संस्थापक और गत पन्द्रह वर्षों से महासचिव के अलावा ऑल इंडिया किचन गार्डन और शिमला की सजैज़ संस्था, नशामुक्ति केन्द्र दोस्त, एज केयर इंडिया और बोलन्टरी हैल्थ एसोसिएशन की आजीवन सदस्य। हिमाचल प्रदेश विज्ञापन, तकनीक और पर्यावरण परिषद में रंग कार्यशालाओं की गत चौदह वर्षों से आयोजक। साथ ही समय-समय पर इनके लिए अनुवाद कार्य भी।

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