Snehdaan

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-546-0

Author:Dr. Harishankar Srivastava

Pages:112


MRP : Rs. 250/-

Stock:In Stock

Rs. 250/-

Details

स्नेहदान

Additional Information

डॉ. हरिशंकर श्रीवास्तव की कहानियों का यह संकलन 'स्नेहदान' हिन्दी साहित्य के उस ऐतिहासिक दौर की धरोहर है, जब प्रेमचंद और उनके युगीन साहित्यकारों द्वारा निर्मित पृष्ठभूमि में तत्कालीन लेखकों द्वारा जीवन-यथार्थ अभिव्यक्ति पा रहा था। संग्रह की प्रायः कहानियाँ गत सदी के चौथे दशक के शुरू के तीन-चार वर्षों में 'सरस्वती', 'विश्ववाणी', 'चाँद', 'संसार' आदि प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं और इन्हें पर्याप्त प्रशंसा भी मिली थी। इन कहानियों में विविध तरह की कठिनाइयों से घिरे सामान्य जनों की जीवन स्थितियाँ वर्णित हैं, जिनका अन्त प्रायः करुण होता है। जिसे आदर्शोन्मख यथार्थ कहा जाता है, वह यहाँ सहज ही उपस्थित है। लेकिन इस आदेर्शोन्मुखता की निष्पति जहाँ तक जाकर होती है, वह ध्यान देने लायक है। 'स्नेहदान' का नायक रामनाथ अपने गाँव की बाल विधवा किशोरी से बहन कर रिश्ता जोड़ता है। इस आदर्श-प्रेरित रिश्ते की रक्षा के लिए वह जमींदार की हत्या तक कर देता है। इन कहानियों से गुजरते हुए पाठक मौजूदा हिन्दी कहानी के बीते युग की झलक पा सकते हैं। लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि इन कहानियों का महत्व सिर्फ़ यहीं तक है। इनमें वर्णित जन-जीवन का स्वरूप भले ही इस अंतराल में बाहरी तौर पर बदल गया है, किन्तु जिन जीवन मूल्यों का पक्ष इन कहानियों में लिया गया है, वे आज भी प्रासंगिक हैं।

About the writer

Dr. Harishankar Srivastava

Dr. Harishankar Srivastava हरिशंकर श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1943 में इतिहास में एम.ए. लगभग चालीस वर्ष का स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में अध्यापन, जिसमें 37 वर्षों तक अध्यक्ष पद पर कार्य करने का अनुभव, फेलो-रायल एशियाटिक सोसाइटी, लन्दन; फेलो-इंस्टीच्यूट ऑफ़ हिस्टारिकल स्टडीज़, कलकत्ता; दो दशक तक सदस्य-इण्डियन हिस्टारिकल रेकार्ड्स कमीशन, भारत सरकार; सदस्य यू.पी. रीजनल रेकार्ड्स सर्वे कमेटी, उत्तर प्रदेश सरकार; सदस्य उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम इतिहास परामर्श दात्री समिति, उत्तर प्रदेश सरकार; अध्यक्ष-मध्यकालीन इतिहास, शाखा, इण्डियन हिस्ट्री कांग्रेस (34 वां अधिवेशन, 1973, चण्डीगढ़); अध्यक्ष मध्यकालीन शाखा पंजाब हिस्ट्री कांग्रेस, पटियाला 1979; सदस्य भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नयी दिल्ली-1991-94; भारत सरकार द्वारा, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के कोर्ट का नामित सदस्य 1991-94, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस 1987 . प्रमुख कृतियाँ 1. मुग़ल सम्राट हुमायूं (हिन्दी), प्रथम संस्करण, आगरा, 1965; द्वितीय संस्करण, भारत सरकार बक टस्ट आफ इण्डिया के माध्यम से 1985 में प्रकाशित। तीसरा संस्करण वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2004 । 2. हिस्ट्री ऑफ़ इण्डियन फेमीन्स (1858-1918), (अंग्रेज़ी), आगरा, 1968 3. मुग़ल शासन प्रणाली : प्रथम संस्करण, मैकमिलन इण्डिया, तृतीय एवं चतुर्थ संशोधित संस्करण, वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2003 4. मध्यकालीन भारतीय इतिहास लेखन (1200-1445), (हिन्दी) 1997, वाराणसी 5. कल्चरल सिन्थेसिस इन मेडिवल इण्डिया, के.पी. जायसवाल मेमोरियल, लेक्चर, (अंग्रेजी) पटना, 2002 इनके अतिरिक्त अस्सी (80) से अधिक शोध लेख तथा स्नेहदान कहानी संग्रह प्रकाशित।

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