Kissa : Ek Se Ek

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-367-1

Author:BRIJ MOHAN

Pages:140

MRP:Rs.150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

किस्सा : एक से एक

Additional Information

सन् 1947 की बात है। भारत का विभाजन हो रहा था। आबादी की अदला-बदली के सिद्धांत को अवांछनीय तथ्य के रूप में स्वीकार कर लिया गया था। दो मार्ग निर्धारित कर लिए गए थे : एक पाकिस्तान से हिंदुस्तान आने के लिए, दूसरा हिन्दुस्तान से पाकिस्तान जाने के लिए। प्रवासियों की संख्या हज़ारों में नहीं, लाखों में थी। इतने बड़े पैमाने पर प्रवासन संसार के अन्य किसी भाग में न हुआ होगा। पाकिस्तान के लाखों निवासियों को घर छोड़कर हिन्दुस्तान आना पड़ा। यदि वहीं पर रहते तो न जाने कितनों की हत्या और हो जाती। किसी के माँ-बाप मारे गए, किसी के बच्चे, किसी की पत्नी, किसी की बहन। जो भी वहाँ से चल सके, चल दिए। यदि इतना समय मिला कि घर का कुछ सामान उठा सके तो उठा लिया। किसी के हाथ में एक डोलची थी, किसी के हाथ में बक्सा किसी ने सिर पर खाट रख ली और उस पर जितना सामान अँटा सकते थे, अँटा लिया। प्रलय का दृश्य दिखाई दे रहा था। कहीं रास्ते में ही किसी गर्भिणी को प्रसव वेदना आरम्भ हो गई। उसके सगे सम्बन्धी, जो भी साथ थे,उसे घेर कर खड़े हो गए। प्रसव होते ही फिर चल दिए। ऐसे में न जाने कितने बच्चे मर गए, कितनी जच्चाएँ काल कवलित हो गई।

About the writer

BRIJ MOHAN

BRIJ MOHAN ब्रजमोहन गणितज्ञ होते हुए भी हिन्दी भाषा और उसके व्याकरण के विकास में सक्रिय योगदान के लिए समादृत विद्वान। स्कूली शिक्षा मुरादाबाद (उ.प्र.) में। एम.ए., एलएल.बी. करने के बाद सन् 1934 में इंगलैंड से पीएच.डी. की उपाधि। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति। वहीं, हिन्दी भाषा और व्याकरण पर कार्य करने का संकल्प और उसे पूरा करने की दिशा में लगातार अध्यवसाय। हिन्दी की विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय पुरस्कार से सम्मानित। सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित विभाग के अध्यक्ष और फिर प्राचार्य रहे। वर्ष 1990 में देहावसान। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : गणितीय कोश, गणित का इतिहास, अर्थ-विज्ञान, अवकलन गणित, मायावर्ग, चिह्न विज्ञान : उत्पादन और सांस्कृतिक संदर्भ, हिन्दी की प्रकृति और शुद्ध प्रयोग, विशेषण प्रयोग, किस्सा : एक से एक, भाषा और व्यवहार, सरल गणित-ज्यामिति, शुद्ध गणित की पाठचर्चा, रूपान्तर कलन, अंग्रेज़ी-हिन्दी वैज्ञानिक कोश (खंड : 1-2), नागरी लिपि : रूप और सुधार, शब्द-चर्चा, मानक हिन्दी आदि।

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