Zindagi Live

Format:Paper Back

ISBN:978-93-89915-99-0

Author:PRIYADARSHAN

Pages:262


MRP : Rs. 399/-

Stock:In Stock

Rs. 399/-

Details

ज़िन्दगी लाइव

Additional Information

प्रियदर्शन के पहले ‌उपन्यास ‘ज़िन्दग़ी लाइव’ को इस बात के एक उद्धरणीय उदाहरण की तरह पेश किया जा सकता है कि कैसे ‌एक गम्भीर सारतत्त्व को पूरी तरह से भारहीन कर लेने के बावजूद, ‌उसकी मूल्यचेतना में पैसा भर घाटा लाये बिना भी ‘लोक-लुभावन’ के विन्यास में उसे पाठक-सुलभ बनाया जा सकता है। रोचक और पठनीय मात्र अपने आप में एक मूल्य नहीं बल्कि मूल्य को आम पाठक के लिये सहेज रखने का आवरण है। अगर मैं कहूँ कि ‘ज़िन्दगी लाइव’ जैसी किताबें साहित्य के लिये मास-मीडिया के सदस्य के रूप में अपनी प्रासंगिकता के अर्जन का एक साधन बनती हैं, साहित्य की किताब का जो एक विशेष प्रकार्य है अपनी तरह के संवेदनात्मक ज्ञान की निर्मिति और प्रसार का है और जो लोक-लुभावन के लक्ष्य के सम्मुख ख़तरे में जा पड़ा है ‌उसकी भी रक्षा करती हैं और दोनों को जोड़ कर अपनी विधा के होने का औचित्य सिद्ध करती हैं, और हिन्दी में अभी यह अपनी विधा में अपनी जैसी पहली और अकेली है तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है, महज़ अभिधा में कही गयी एक बात है। अर्चना वर्मा, सुधी आलोचक (अब दिवंगत)

About the writer

PRIYADARSHAN

PRIYADARSHAN प्रियदर्शन जन्म: 24 जून, 1968, रांची प्रकाशित पुस्तकें: उसके हिस्से का जादू, बारिश, धुआँ और दोस्त (कहानी संग्रह); नष्ट कुछ भी नहीं होता (कविता संग्रह); इतिहास गढ़ता समय (आलेख संग्रह); ख़बर बेख़बर (पत्रकारिता पर केन्द्रित); ग्लोबल समय में कविता, ग्लोबल समय में गद्य (आलोचना)। अनुवाद: आधी रात की सन्तानें (उपन्यास, मिडनाइट्स चिल्ड्रेन, सलमान रुश्दी), क़त्लगाह (उपन्यास, टॉर्चर्ड ऐंड डैम्ड, रॉबर्ट पेन), बहुजन हिताय (द ग्रेटर कॉमन गुड, अरुंधती रॉय), पर्यावरणवादी पीटर स्कॉट की जीवनी, पर्यावरण प्रहरी (लेखों का संग्रह-द ग्रीन टीचर), कुछ गमे दौरां (लेख संग्रह, के. बिक्रम सिंह)। सम्पादन: कहानियाँ रिश्तों की: बड़े बुजुर्ग; पत्रकारिता में अनुवाद। पुरस्कार: कहानी संग्रह ‘उसके हिस्से का जादू’ के लिए स्पन्दन पुरस्कार 2009।

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