Neelchandra

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-89915-26-6

Author:RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

Pages:368


MRP : Rs. 595/-

Stock:In Stock

Rs. 595/-

Details

नीलचन्द्र

Additional Information

आप कोई भी हो, कहीं भी हो, सफल या असफल, घृणा, उपेक्षा, हिंसा, अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार से लदे हो या इस प्रसाद को बाँटकर जश्न मना रहे हो फिर भी न अपनी मर्ज़ी से रो पाते हो और न ही हँस पाते हो तो एक काम करो-घर या बाहर, दिन हो या रात, एक कोने में बैठकर, उथल-पुथल भरे मन की आँखों के सामने, हाथ में 'नीलचन्द्र' को बेहद चिड़चिड़े और कोफ़्त होते हुए लिए हो-उसके मुखपृष्ठ को सिर्फ़ देखो, देखते रहो, मन साथ दे या नहीं पर देखते रहो, एक दिन, दो दिन, तीन दिन या इससे अधिक दिन, चाहे जितनी देर देखो, पर देखते रहो। एक समय आयेगा 'नीलचन्द्र' को सामने न पाकर भी ध्यान उस पर ऐसा लग जायेगा कि हटाने से भी नहीं हटेगा। तब तुम एक आवाज़ सुनोगे, “अब ‘नीलचन्द्र' को खोलो, आहिस्ता से और मन करे तो पढ़ने लगो। जहाँ तक, जितना पढ़ सको, पढ़ते जाओ। कोई जल्दी नहीं है।" कुछ समय बाद तुम अपनी दिनचर्या में उस पढ़े को अपने अनुभव से गुज़रता पाओगे। तुम्हें विश्वास होने लगेगा कि जो सपने में भी नहीं सोचा था, वह तुम्हारे अनुभव का एक ज़रूरी हिस्सा बन चुका है। यह जानकर तुम्हें आश्चर्य होगा कि वह आवाज़ ईश्वर, अल्लाह, गॉड की नहीं, तुम्हारी है और यह रास्ता तुम्हारा खोजा है। यह सब बताने के लिए मुझे श्रीअरविन्द ने कहा है-कोई तप-साधना नहीं करनी, न कहीं आना-जाना है। जहाँ जिस मुद्रा में बैठे हो, वहीं से ‘नीलचन्द्र' शुरू कर देना, क्योंकि वहाँ भी मैं नहीं, तुम अपने को पाओगे। फिर इसका दूसरा भाग ‘आनन्द पथ' उठाओ। वह तुम्हारी ज़िन्दगी का बेशक़ीमती भाग है।

About the writer

RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR

RAJENDRA MOHAN BHATNAGAR जन्म : सन् 1938 अम्बाला (हरियाणा) में। रोहतक के ज़मींदार परिवार से। प्रकाशित वाङ्मय उपन्यास : दिल्ली चलो, गौरांग, दंश, नीले घोड़े का सवार, न गोपी : न राधा, स्वराज्य, कुली बैरिस्टर, राज राजेश्वर, सरदार, अन्तिम सत्याग्रही, रास्ता यह भी है, एक अन्तहीन युद्ध, रिवोल्ट, मोनालिसा, प्रेमदीवानी, युगपुरुष अंबेडकर, महाबानो, अमृत घट, ज़िन्दगी का एहसास, माटी की गन्ध, परिधि, माटी की पुकार, वैलेंटाइन डे, टूटे आकार, नया मसीहा, कायदे आजम, विवेकानन्द, तमसो मा ज्योतिर्गमय, सत्यमेव जयते, सर्वोदय, मंचनायक, अन्दर की आग, मन्ना बेगम, वसुधा, शुभप्रभात, वाग्देवी, जोगिन, अनन्त आकाश, खुदा गवाह है, श्याम प्रिया आदि 65 से अधिक उपन्यास। कहानी : बस्ती दर्द, मोम की उँगलियाँ, चाणक्य की हार, एक टुकड़ा धूप, माँग का सिन्दूर, थामली, गौरैया, अंजाम, सप्त किरण आदि 11 संग्रह। नाटक : माटी कहे कुम्हार से, मीरा, नायिका, सूर्यास्त का चोर, सारथिपुत्र, रक्तध्वज, सेनानी, दुरभिसंधि, शताब्दी पुरुष, ताम्रपत्र, सूर्याणी आदि 15 नाटक। आलोचना : आधुनिक हिन्दी कविता ग्रन्थ विचार, सामयिकी, महाकवि घनानन्द, सूरदास, कबीर, जैनेन्द्र और उनका समग्र साहित्य, जैनेन्द्र और निबन्ध साहित्य आदि बाईस ग्रन्थ। पुरस्कार : राजस्थान अकादमी का सर्वोच्च मीरा पुरस्कार, महाराणा कुम्भा पुरस्कार, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, नाहर सम्मान पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार। अनुवाद : अंग्रेज़ी, फ्रेंच, उड़िया, मराठी, कन्नड़, गुजराती आदि भाषाओं में।

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