Vijaydev Narayan Sahi : Rachna-Sanchayan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8901-250-7

Author:Edited by Gopeshwar Singh

Pages:624


MRP : Rs. 795/-

Stock:In Stock

Rs. 795/-

Details

विजयदेव नारायण साही रचना-संचयन

Additional Information

हिन्दी साहित्य की नयी आधुनिकता के दौर में, जो 1950 के आसपास शुरू हुआ, विजयदेव नारायण साही की उपस्थिति और हस्तक्षेप बहुत मूल्यवान् रहे हैं। वे महत्त्वपूर्ण कवि, कुशाग्र आलोचक, सजग सम्पादक, मुक्त चिन्तक और ज़मीनी समाज-चिन्तक एक साथ थे। उनका समूचा साहित्य और सामाजिक कर्म, एक तरह से, बीच बहस में हुआ। उनका अपने समय के समाजवादी नेताओं विशेषतः राम मनोहर लोहिया से सार्थक संवाद था और उन्होंने बुनकरों आदि के कई आन्दोलनों में भाग लिया था। आलोचना में उनका जायसी का हमारे समय के लिए पुनराविष्कार, ‘लघु मानव के बहाने हिन्दी कविता पर एक बहस' और ‘साखी' कविता-संग्रह की अनेक कविताओं के माध्यम से कबीर का पुनर्वास साहित्य के अत्यन्त विचारोत्तेजक और सर्जनात्मक मुक़ाम हैं। अपने समय में हावी हई वाम दष्टि के बरअक्स साही जी ने समानधर्मिता का ऐसा विकल्प रचने की कोशिश की जिसमें व्यक्ति और समष्टि एक-दूसरे के लिए अनिवार्य हैं और परस्पर अतिक्रमण नहीं करते हैं। गोपेश्वर सिंह ने मनोयोग और अध्यवसाय से साही जी की संचयिता तैयार की है जिससे आज के पाठकों को उनके वितान, जटिल संयोजन, साफ़गोई, वैचारिक प्रखरता और बौद्धिक-सर्जनात्मक उन्मेष से सीधा साक्षात्कार हो सकेगा। वर्तमान परिदृश्य में विजयदेव नारायण साही का यह पुनर्वास अपने आप में एक ज़रूरी हस्तक्षेप है। रज़ा फ़ाउण्डेशन इस संचयिता को प्रस्तुत करने में प्रसन्नता अनुभव कर रहा है। -अशोक वाजपेयी

About the writer

Edited by Gopeshwar Singh

Edited by Gopeshwar Singh गोपेश्वर सिंह जन्म : 24 नवम्बर, 1955, ग्राम-बड़कागाँव पकड़ीयार, जनपद-गोपालगंज, बिहार में। शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी.। जे. पी. आन्दोलन में सक्रिय रहे। इस दौरान कई बार जेल-यात्रा। 1983 से अध्यापन। पटना विश्वविद्यालय, पटना एवं सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में करीब दो दशक तक अध्यापन के बाद सितम्बर 2004 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। 2010 से 2013 तक हिन्दी विभाग के अध्यक्ष। साहित्य के साथ सामाजिकसांस्कृतिक विषयों पर हिन्दी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन। नलिन विलोचन शर्मा (विनिबन्ध), साहित्य से संवाद, आलोचना का नया पाठ, भक्ति आन्दोलन और काव्य एवं आलोचना के परिसर के अतिरिक्त भक्ति आन्दोलन के सामाजिक आधार, नलिन विलोचन शर्मा : संकलित निबन्ध, कल्पना का उर्वशी विवाद, शमशेर बहादुर सिंह : संकलित कविताएँ और नलिन विलोचन शर्मा : रचना संचयन (सम्पादित) पुस्तकें प्रकाशित। आपको आचार्य परशुराम चतुर्वेदी सम्मान तथा रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान प्राप्त हैं। सम्प्रति : प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, कला संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली-110007 ई-मेल : gopeshwar1955@gmail.com

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