Pensioner

Format:Paper Back

ISBN:978-938991-529-7

Author:Dhirendra Singh Jafa

Pages:24


MRP : Rs. 50/-

Stock:In Stock

Rs. 50/-

Details

पेंशनर

Additional Information

बिपिन बाबू को लगा कि अधिकांश पेंशनयाफ़्ता, विशेषकर विधुर, जीवन में अकेले रह गये थे। संगी-साथी के अभाव में उनका भावनात्मक लगाव परिवार के सदस्यों पर केन्द्रित होना स्वाभाविक था। इस स्थिति में घर की कर्ताधर्ता यानी बहू की ओर से थोड़ा प्रेम, थोड़ी सहानुभूति, थोड़ी सेवा-शुश्रूषा चाहे छद्म ही सही, इन बूढ़े लोगों को अपने वश में करने में पर्याप्त होते थे। उसके पश्चात् यह बहू की प्रवृत्ति एवं स्वभाव पर निर्भर था कि बुज़ुर्गवार सम्मान और सन्तोष से दिन बिताएँगे अथवा उपेक्षा और ग्लानि में। बिपिन बाबू को लगा कि सम्भवतः केवलराम जी और उनके प्रकार के अन्य व्यक्ति अपनी बहूरानियों के मामले में अधिक भाग्यशाली नहीं थे।

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