Yaadon Ke Jharokhe

Format:Paper Back

ISBN:978-93-9067-826-6

Author:PROF. RAJMANI SHARMA

Pages:160


MRP : Rs. 300/-

Stock:In Stock

Rs. 300/-

Details

यादों के झरोखे

Additional Information

हर तरह के अभावों-अपमानों से जूझते हुए एक व्यक्ति किस प्रकार अपना जीवन निर्मित करता है, इसकी कटु-यथार्थ गाथा है-‘यादों के झरोखे’। इसके लेखक का यह जीवन या उसके वे कार्य जिन्हें अपनी राह का पाथेय बनाया, अविस्मरणीय हैं; भले ही वाद-वर्ग-विशेष द्वारा इन्हीं का सहारा लेकर उसकी राह में काँटे बिछाये गये हों, किन्तु क्या उसकी राह रोक पाये? नहीं, उसने इन काँटों को भी फूल बनाया, वह आगे बढ़ता रहा, विकास के पथ पर बढ़ता रहा, किस प्रकार, इसी गाथा का दस्तावेज़ है-यह पुस्तक। इसमें शैक्षिक और बौद्धिक वर्ग की गुटबाज़ी, एक-दूसरे को धराशायी करने की कुत्सित प्रवृत्तियों का चित्रण है, और है लेखक की यथार्थ आत्मकथा भी। प्रथम खण्ड ‘संघर्ष गाथा’ में जहाँ ज्वलन्त यथार्थ है, वहीं ‘पुण्य-स्मरण’ नामक दूसरे खण्ड में रोचक संस्मरण हैं। इस पुस्तक में एक नये विमर्श की राह और कथावस्तु के धरातल पर नयी सामग्री का संकेत भी है। हर तरह के अभावों-अपमानों से जूझते हुए एक व्यक्ति किस प्रकार अपना जीवन निर्मित करता है, इसकी कटु-यथार्थ गाथा है-‘यादों के झरोखे’। इसके लेखक का यह जीवन या उसके वे कार्य जिन्हें अपनी राह का पाथेय बनाया, अविस्मरणीय हैं; भले ही वाद-वर्ग-विशेष द्वारा इन्हीं का सहारा लेकर उसकी राह में काँटे बिछाये गये हों, किन्तु क्या उसकी राह रोक पाये? नहीं, उसने इन काँटों को भी फूल बनाया, वह आगे बढ़ता रहा, विकास के पथ पर बढ़ता रहा, किस प्रकार, इसी गाथा का दस्तावेज़ है-यह पुस्तक। इसमें शैक्षिक और बौद्धिक वर्ग की गुटबाज़ी, एक-दूसरे को धराशायी करने की कुत्सित प्रवृत्तियों का चित्रण है, और है लेखक की यथार्थ आत्मकथा भी। प्रथम खण्ड ‘संघर्ष गाथा’ में जहाँ ज्वलन्त यथार्थ है, वहीं ‘पुण्य-स्मरण’ नामक दूसरे खण्ड में रोचक संस्मरण हैं। इस पुस्तक में एक नये विमर्श की राह और कथावस्तु के धरातल पर नयी सामग्री का संकेत भी है।

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