Bhartiya Bhashaon Mein Ramkatha : Marathi Bhasha

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-535-7

Author:

Pages:192


MRP : Rs. 395/-

Stock:In Stock

Rs. 395/-

Details

भारतीय भाषाओं में रामकथा : मराठी भाषा

Additional Information

मराठी साहित्य को प्राचीन काल से वर्तमान तक की कालावधि में अनगिनत साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से समृद्ध किया है। मराठी भाषा में रामायण, रामकथा, उसके पात्र, मनुष्येतर पात्र, उनकी मनोभूमिका, घटना, रामायण कथा के बहुविध पहलू, वाल्मीकि की विद्वत्ता, विविध साहित्यकारों की अनेक सृजनात्मक रचनाएँ, अनेक विद्वानों के रामायण तथा रामकथा पर लिखे वैचारिक लेख आदि से गुज़रने का स्वर्ण अवसर मिला। अनुसन्धानपरक आलेख, निबन्ध, ललित रचनाएँ स्तोत्र, कविता, उपन्यास, कहानी, एकांकी जैसी अनेक विधाओं की रचनाएँ उपलब्ध होती गयीं और यह भी प्रमाण मिलते गये कि हर किसी की लेखनात्मा 'रामायण' से उद्भूत हुई है। प्रस्तुत ग्रन्थ में 34 लेख हैं। रामायण में करुणा, सहानुभूति, गहरी मित्रता, स्वामिनिष्ठा, अच्छा नेतृत्व, असीम त्याग, नैष्ठिक कर्तव्यपरायणता, शत्रु का भी सम्मान करने की उदार और उदात्त मानसिकता, उत्कट बन्धु प्रेम, कर्तव्यपालन हेतु प्राण हथेली पर लेते रहने की वीरतापूर्ण प्रवृत्ति आदि उच्च नैतिक गुणों का अत्यन्त समुचित और सुयोग्य समन्वय भी है। इनका अध्ययन भी कइयों द्वारा किया गया है। रामकथा से सम्बन्धित हर व्यक्ति की आचरण, प्रवृत्ति, उसका सामाजिक स्थान आदि पर विचार तथा मत प्रदर्शन होता आया है। रामकथा काव्य तथा इतिहास के तत्त्व पिरोती है। रामकथा सामाजिक तत्त्वों, नीतिमूल्यों, राजनीतिक अधिकारों तथा नियमों को लिए चलती है। साथ ही राष्ट्रीयता, प्रजाहित, लोकानुनय, परराष्ट्र व्यवहार, स्नेहीजनों का महत्त्व निरूपित करती है। राम भारत में ही नहीं समस्त विश्व में व्याप्त हैं। कइयों ने रामायण तथा उसके अनेक उपकथाबीजों पर लेखन किया है। 'रामायण' या 'रामकथा' तथा उसमें वर्णित विविध पात्रों, विशेष प्रसंगों पर लिखी गयी कृतियों से गुज़रते हुए एवं लोकपरम्परा से उसका असाधारणत्व स्पष्ट होता गया। इससे जुड़कर रामकथा सम्बन्धी जितना कार्य किया जाये अल्प ही है।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality