Lhasa Ka Lahoo

Format:Paper Back

ISBN:978-93-90678-50-1

Author:Conceptualization and Translation by Anuradha Sing

Pages:232


MRP : Rs. 399/-

Stock:In Stock

Rs. 399/-

Details

ल्हासा का लहू

Additional Information

विस्तारवादी और बर्बर हुकूमतें किसी समाज को अपने नियन्त्रण में रखने के लिए उनकी सामूहिक स्मृतियों को नष्ट-भ्रष्ट कर देना चाहती हैं। सत्तर साल पहले चीनी क़ब्ज़े के बाद तिब्बती संस्कृति को समूल नष्ट कर देने की उसकी कोशिशों के ख़िलाफ़ अपनी क़लम से लड़ने वाले यहाँ संकलित युवा स्वतन्त्रता सेनानी कवि वैश्विक यथार्थ के दबाव में भले अपनी मातृभाषा छोड़कर अंग्रेज़ी में लिखने को मजबूर हुए लेकिन स्मृतियाँ भाषा की क़ैद से मुक्त रही हैं। प्रख्यात कवि, अनुवादक अनुराधा सिंह पिछले कई बरस से तिब्बती कविताओं का परिचय हिन्दी पाठकों से करवाती रही हैं और अब इस विशद संकलन के साथ उपस्थित हुई हैं। हिन्दी की दुनिया में निश्चय ही इसका उत्साहपूर्ण स्वागत होगा। -यादवेन्द्र वरिष्ठ कवि, प्रख्यात अनुवादक, विचारक/ तिब्बत को बहुधा गीत, संगीत व कविता की भूमि कहा जाता रहा है। इसकी वैभवशाली नदियों की तरह उत्कृष्ट काव्य परम्परा भी पूरी सभ्यता में सतत प्रवाहमान है। तिब्बत की इस प्राचीन परम्परा ने निर्वासित तिब्बत में भी अपनी जड़ें जमा ली हैं और इसके इतिहास और पहचान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। यह पुस्तक ल्हासा का लहू यक़ीनन हिन्दी में तिब्बत सम्बन्धी लेखन का प्रथम संचयन है। अनुराधा सिंह का समर्थ अनुवाद पाठकों के समक्ष एक नये संसार का द्वार खोलता है, उन्हें तिब्बती कवियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के साथ, एक परायी धरती पर रह कर लिखने की व्यथा का आस्वाद भी कराता है। भुचुंग डी. सोनम, प्रमुख निर्वासित तिब्बती कवि, सम्पादक, अनुवादक, चिन्तक व आन्दोलनकर्ता

About the writer

Conceptualization and Translation by Anuradha Sing

Conceptualization and Translation by Anuradha Sing अनुराधा सिंह हिन्दी की सुपरिचित कवयित्री, लेखिका और अनुवादक। ओबरा, उत्तर प्रदेश में जन्म। आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान में सम्पूर्ण शिक्षा-दीक्षा। भारतीय ज्ञानपीठ से ईश्वर नहीं नींद चाहिए नामक कविता संग्रह प्रकाशित व चर्चित, 15वें शीला सिद्धान्तकर सम्मान व 19वें हेमन्त स्मृति सम्मान से पुरस्कृत। स्वर्गीय मंगलेश डबराल पर समकालीन स्त्री कवियों द्वारा लिखे गये संस्मरणों की किताब बचा रहे स्पर्श का सम्पादन। अश्वेत और तिब्बती कविताओं के अतिरिक्त ख्यात साम्यवादी लेखक बेनेडिक्ट ऐंडरसन का हिन्दी अनुवाद उल्लेखनीय। अन्तरराष्ट्रीय कविता संचयन टु लेट द लाइट इन के हिन्दी खण्ड का सम्पादन। मुम्बई में काला घोड़ा कला महोत्सव, भारत भवन भोपाल में दिनमान समारोह, रज़ा फ़ाउण्डेशन के युवा 2017, रज़ा फ़ाउण्डेशन द्वारा ही दिल्ली व पटना में आयोजित आज कविता तथा युवा कविता समारोह, स्वर्गीय वीरेन डंगवाल की स्मृति में आयोजित वीरेनियत, टैगोर विश्वविद्यालय के लिटरेचर व आर्ट फेस्टिवल इत्यादि में कविता पाठ के लिए आमन्त्रित। प्रमुख पत्रिकाओं के विशेषांकों में कविताएँ, अनुवाद, आलोचनात्मक निबन्ध व साक्षात्कार प्रकाशित। सम्प्रति : मुम्बई में प्रबन्धन कक्षाओं में बिज़नेस कम्युनिकेशन का अध्यापन। ईमेल : anuradhadei@yahoo.co.in मोबाइल : 9930096966

Books by Conceptualization and Translation by Anuradha Sing

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality